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विक्की यादव/रेणुकूट

◆ सर्द हो या गर्मी खुले आसमा में सो रहे असहायों की मदत करने होती है खुशी कोई मेरे दिल से यह पुछे: प्रदीप श्रीवास्तव

रेणुकूट। किसी की मदत करना सबसे बडा धन कहलाता है, कोई देखे या ना देखे पर आपके कार्यो को उपर वाला जरूर देखता है ऐसी ही एक संस्था मानवता की थाली रेणुकूट में मोजूद है जो कई वर्षो से बेखर जरूरतमंदो को शाम के वक्त भोजन के पैकेट देकर उनकी भूख मिटाता है। संस्था के संस्थापक प्रदीप कुमार श्रीवास्तव से जब सूरजवार्ता की टीम ने जानना चाहा तो उन्होने बताया की हम अपने लिए तो बहुत कुछ करते है सभी पर दूसरों की मदत करने में उससे कही ज्यादा अच्छा लगता है।

कोई मेरे दिल से पुछे, खुले आसमान में फूटपाथ पर जब कोई खाली पेट सोता है तो उसकी शरीर तो पडा रहता है पर खाली पेट आत्मा भी तडपता है, जब हम अपने एक नेवाले से आधा उसको देते है तो उसकी आत्मा भी खुशी होकर चैन की नीद सोने देता है। इसी क्रम में हमे यह कार्य करने में खुशी होती है। 6 व 7 दिसंबर को गरीब जरूरतमंद और असहायो के लिए निरंतर सोचने वाली और प्रतिदिन निःशुल्क में भोजन वितरण करने वाली नगर की स्वपोषीत संस्था मानवता की थाली के सदस्यों ने स्कूटी और बाइक पर कम्बल लेकर बीजपुर मोड़ से पिपरी चौराहे तक के मेन रोड के किनारे फुटपाथ पर किन्हीं कारण वश पर सर्द भरी रात को पन्नी, बोरी व अलाव के सहारे खुले आसमान के नीचे रात गुजारने वालों को मानवता की थाली टीम के सदस्यों द्वारा ‘राहत’ पहल चलाकर पच्चासो लोगों कम्बल भी दिया।

बता दूं कि इस संस्था के कार्यो को देख कई जगहों पर सम्मानित किया जा चूका है। वही इस मौके पर मानवता की थाली टीम के सदस्य कन्हैया लाल यादव जी, सौरभ श्रीवास्तव जी एव वितरण स्थल के स्थानीय नागरिक लोग मौजूद रहे।